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mahabharat 1.66.38: रुद्रों के अलग-अलग पक्ष या गण होते हैं, साध्य, मरुत और वसुओं के भी अलग-अलग गण होते हैं। इसी प्रकार भार्गव और विश्वदेवगण को भी जानना चाहिए। 38॥   |   mahabharat अध्याय 1.66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.66.38 
रुद्राणामपर: पक्ष: साध्यानां मरुतां तथा।
वसूनां भार्गवं विद्याद् विश्वेदेवांस्तथैव च॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
रुद्रों के अलग-अलग पक्ष या गण होते हैं, साध्य, मरुत और वसुओं के भी अलग-अलग गण होते हैं। इसी प्रकार भार्गव और विश्वदेवगण को भी जानना चाहिए। 38॥
 
Rudras have a separate Paksha or Gana, Sadhya, Marut and Vasus also have separate Gana. Similarly, Bhargava and Vishvadevgan should also be known. 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)