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mahabharat 1.66.31: ब्रह्माजी का दाहिना वक्षस्थल काटकर भगवान धर्म मनुष्य रूप में प्रकट हुए, जो सम्पूर्ण जगत् को सुख देने वाले हैं ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 1.66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.66.31 
स्तनं तु दक्षिणं भित्त्वा ब्रह्मणो नरविग्रह:।
नि:सृतो भगवान् धर्म: सर्वलोकसुखावह:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी का दाहिना वक्षस्थल काटकर भगवान धर्म मनुष्य रूप में प्रकट हुए, जो सम्पूर्ण जगत् को सुख देने वाले हैं ॥31॥
 
By severing Brahmaji's right breast, Lord Dharma appeared in human form, who is the one who gives happiness to the entire world. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)