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mahabharat 1.66.30: मनुष्य भी अपनी जीविका के लिए महात्मा विश्वकर्मा की शिल्पकला का आश्रय लेते हैं और अविनाशी विश्वकर्मा की सदैव पूजा करते हैं ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 1.66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.66.30 
मनुष्याश्चोपजीवन्ति यस्य शिल्पं महात्मन:।
पूजयन्ति च यं नित्यं विश्वकर्माणमव्ययम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य भी अपनी जीविका के लिए महात्मा विश्वकर्मा की शिल्पकला का आश्रय लेते हैं और अविनाशी विश्वकर्मा की सदैव पूजा करते हैं ॥30॥
 
Human beings too take shelter of the craftsmanship of Mahatma Vishwakarma for their livelihood and always worship the indestructible Vishwakarma. ॥30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)