Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.66.2-3: मृगव्याध, सर्प, महायशस्वी निर्ऋति, अजैकपाद, अहिर्बुध्न्य, शत्रुसन्तपन पिनाकी, दहन, ईश्वर, परम तेजस्वी कपाली, स्थाणु और भगवान भव- ये ग्यारह रुद्र माने गये हैं। 2-3॥   |   mahabharat अध्याय 1.66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  1.66.2-3 
मृगव्याधश्च सर्पश्च निर्ऋतिश्च महायशा:।
अजैकपादहिर्बुध्न्य: पिनाकी च परंतप:॥ २॥
दहनोऽथेश्वरश्चैव कपाली च महाद्युति:।
स्थाणुर्भवश्च भगवान् रुद्रा एकादश स्मृता:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
मृगव्याध, सर्प, महायशस्वी निर्ऋति, अजैकपाद, अहिर्बुध्न्य, शत्रुसन्तपन पिनाकी, दहन, ईश्वर, परम तेजस्वी कपाली, स्थाणु और भगवान भव- ये ग्यारह रुद्र माने गये हैं। 2-3॥
 
Mrigavyadh, Sarp, Mahayashasvi Nirriti, Ajaikpad, Ahirbudhnya, Shatrusantapan Pinaki, Dahan, Ishwar, supremely radiant Kapali, Sthanu and Bhagwan Bhava – these are considered eleven Rudras. 2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)