श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  1.66.14-15 
नामतो धर्मपत्न्यस्ता: कीर्त्यमाना निबोध मे।
कीर्तिर्लक्ष्मीर्धृतिर्मेधा पुष्टि: श्रद्धा क्रिया तथा॥ १४॥
बुद्धिर्लज्जा मतिश्चैव पत्न्यो धर्मस्य ता दश।
द्वाराण्येतानि धर्मस्य विहितानि स्वयम्भुवा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अब मैं तुम्हें धर्म की पत्नियों के नाम बताता हूँ, सुनो- कीर्ति, लक्ष्मी, धृति, मेधा, पुष्टि, श्रद्धा, क्रिया, बुद्धि, लज्जा और मति- ये धर्म की दस पत्नियाँ हैं। स्वयंभू ब्रह्माजी ने इन सबको धर्म का द्वार निर्धारित किया है अर्थात् इनके द्वारा ही धर्म में प्रवेश होता है॥ 14-15॥
 
Now I am telling you the names of Dharma's wives, listen- Kirti, Lakshmi, Dhriti, Medha, Pushti, Shraddha, Kriya, Buddhi, Lajja and Mati - these are the ten wives of Dharma. Swayambhu Brahmaji has determined all of them as the door of Dharma i.e. through them one enters Dharma.॥ 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)