श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 65: मरीचि आदि महर्षियों तथा अदिति आदि दक्षकन्याओंके वंशका विवरण  »  श्लोक 53-54
 
 
श्लोक  1.65.53-54 
इति ते सर्वभूतानां सम्भव: कथितो मया।
यथावत् सम्परिख्यातो गन्धर्वाप्सरसां तथा॥ ५३॥
भुजङ्गानां सुपर्णानां रुद्राणां मरुतां तथा।
गवां च ब्राह्मणानां च श्रीमतां पुण्यकर्मणाम्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
राजन! इस प्रकार मैंने तुमसे समस्त प्राणियों की उत्पत्ति की कथा कही है। इसी प्रकार गन्धर्वों, अप्सराओं, नागों, सुपर्णों, रुद्रों, मरुतगणों, गौओं तथा धनवान एवं गुणवान ब्राह्मणों के जन्म की कथा भी बहुत अच्छी तरह कही है॥53-54॥
 
King! In this way I have told you the story of the origin of all beings. Similarly, the story of the birth of Gandharvas, Apsaras, Nagas, Suparnas, Rudras, Marutgans, cows and the wealthy and virtuous Brahmins have also been told very well. ॥ 53-54॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd