Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.65.37: इनके अतिरिक्त त्वष्टाधर और अत्रि नामक दो पुत्र और भी थे, जो हिंसा कर्म करने और करवाने वाले थे। उशना के सभी पुत्र सूर्य के समान तेजस्वी थे और ब्रह्मलोक को ही अपना परम आश्रय मानते थे ॥37॥ | mahabharat अध्याय 1.65: मरीचि आदि महर्षियों तथा अदिति आदि दक्षकन्याओंके वंशका विवरण । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इनके अतिरिक्त त्वष्टाधर और अत्रि नामक दो पुत्र और भी थे, जो हिंसा कर्म करने और करवाने वाले थे। उशना के सभी पुत्र सूर्य के समान तेजस्वी थे और ब्रह्मलोक को ही अपना परम आश्रय मानते थे ॥37॥
Apart from these, there were two more sons, Tvashtadhar and Atri, who were the ones who performed and got the acts of violence done. All the sons of Ushna were as bright as the Sun and considered Brahmaloka as their ultimate refuge. 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥