Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.64.45: महाराज! जो शुभ सृष्टिकर्ता, इस भूमि के पालनकर्ता और स्वामी हैं, सबकी उत्पत्ति के कारण हैं और समस्त प्राणियों के अधिदेवता हैं, वे ब्रह्माजी उस समय इस भूमि से इस प्रकार बोले॥45॥   |   mahabharat अध्याय 1.64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.64.45 
तामुवाच महाराज भूमिं भूमिपति: प्रभु:।
प्रभव: सर्वभूतानामीश: शम्भु: प्रजापति:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जो शुभ सृष्टिकर्ता, इस भूमि के पालनकर्ता और स्वामी हैं, सबकी उत्पत्ति के कारण हैं और समस्त प्राणियों के अधिदेवता हैं, वे ब्रह्माजी उस समय इस भूमि से इस प्रकार बोले॥45॥
 
Maharaj! Brahmaji, the auspicious creator, who is the nurturer and lord of this land, the reason for the origin of all and the supreme god of all living beings, spoke thus to the land at that time. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)