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mahabharat 1.64.36: वेद और ब्राह्मण विरोधी लोग अपने पराक्रम के मद में चूर होकर, अहंकार और बल के नशे में चूर होकर जहाँ-तहाँ आश्रमों में निवास करने वाले महर्षियों का अपमान करने लगे ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 1.64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.64.36 
आश्रमस्थान् महर्षींश्च धर्षयन्तस्ततस्तत:।
अब्रह्मण्या वीर्यमदा मत्ता मदबलेन च॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वेद और ब्राह्मण विरोधी लोग अपने पराक्रम के मद में चूर होकर, अहंकार और बल के नशे में चूर होकर जहाँ-तहाँ आश्रमों में निवास करने वाले महर्षियों का अपमान करने लगे ॥36॥
 
Opponents of the Vedas and Brahmins, intoxicated with their valour and intoxicated with pride and strength, they began to insult the great sages residing in ashrams here and there. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)