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mahabharat 1.64.34: वह ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रों को सताया करता था। वह अपने बल और पराक्रम से अन्य प्राणियों को भी कष्ट पहुँचाता था।   |   mahabharat अध्याय 1.64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.64.34 
ब्राह्मणान् क्षत्रियान् वैश्याञ्छूद्रांश्चैवाप्यपीडयन्।
अन्यानि चैव सत्त्वानि पीडयामासुरोजसा॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वह ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रों को सताया करता था। वह अपने बल और पराक्रम से अन्य प्राणियों को भी कष्ट पहुँचाता था।
 
He used to harass Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and Shudras. He used to torment other creatures also with his strength and valour. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)