Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.64.32-33: स्वर्ग से इस लोक में आए अनेक दानव और राक्षस, जो राजा के रूप में जन्मे थे, अत्यंत मदोन्मत्त थे। वे शक्तिशाली होने के साथ-साथ अहंकारी भी थे। वे समुद्र तक सम्पूर्ण पृथ्वी पर घूमते रहते थे और अनेक रूप धारण करके अपने शत्रुओं को अपमानित करते थे। | mahabharat अध्याय 1.64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथ जाता महीपाला: केचिद् बहुमदान्विता:।
दिते: पुत्रा दनोश्चैव तदा लोक इह च्युता:॥ ३२॥
वीर्यवन्तोऽवलिप्तास्ते नानारूपधरा महीम्।
इमां सागरपर्यन्तां परीयुररिमर्दना:॥ ३३॥
अनुवाद
स्वर्ग से इस लोक में आए अनेक दानव और राक्षस, जो राजा के रूप में जन्मे थे, अत्यंत मदोन्मत्त थे। वे शक्तिशाली होने के साथ-साथ अहंकारी भी थे। वे समुद्र तक सम्पूर्ण पृथ्वी पर घूमते रहते थे और अनेक रूप धारण करके अपने शत्रुओं को अपमानित करते थे।
Many demons and devils who had fallen from heaven to this world and were born as kings were extremely intoxicated. They were powerful as well as arrogant. They used to roam all over the earth up to the sea, humiliating their enemies by assuming many forms.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥