श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  1.64.30-31 
गोष्वश्वेषु च राजेन्द्र खरोष्ट्रमहिषेषु च।
क्रव्यात्सु चैव भूतेषु गजेषु च मृगेषु च॥ ३०॥
जातैरिह महीपाल जायमानैश्च तैर्मही।
न शशाकात्मनाऽऽत्मानमियं धारयितुं धरा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! यहाँ गाय, घोड़े, गधे, ऊँट, भैंस, कच्चा मांस खाने वाले पशु, हाथी और हिरणों की योनियों में राक्षस उत्पन्न हुए थे और अब भी उत्पन्न हो रहे हैं। यह पृथ्वी उनसे ऐसी भर गई कि वह अपने को भी धारण नहीं कर सकती थी ॥30-31॥
 
Rajendra! Demons were born here in the wombs of cows, horses, donkeys, camels, buffaloes, animals that eat raw meat, elephants and deer and they are still taking birth. This earth was filled with them in such a way that it could not even hold itself. ॥ 30-31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)