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mahabharat 1.64.22: जब तक बछड़े केवल दूध पर जीवित रहते थे और घास नहीं चरते थे, तब तक लोग गायों का दूध नहीं दुहते थे। व्यापारी झूठे नाप-तौल से विक्रय योग्य माल नहीं बेचते थे।   |   mahabharat अध्याय 1.64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.64.22 
फेनपांश्च तथा वत्सान् न दुहन्ति स्म मानवा:।
न कूटमानैर्वणिज: पण्यं विक्रीणते तदा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जब तक बछड़े केवल दूध पर जीवित रहते थे और घास नहीं चरते थे, तब तक लोग गायों का दूध नहीं दुहते थे। व्यापारी झूठे नाप-तौल से विक्रय योग्य माल नहीं बेचते थे।
 
As long as the calves lived only on milk and did not graze on grass, people did not milk the cows. Merchants did not sell saleable goods by false measurement and weighing. 22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)