श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 64: ब्राह्मणोंद्वारा क्षत्रियवंशकी उत्पत्ति और वृद्धि तथा उस समयके धार्मिक राज्यका वर्णन; असुरोंका जन्म और उनके भारसे पीड़ित पृथ्वीका ब्रह्माजीकी शरणमें जाना तथा ब्रह्माजीका देवताओंको अपने अंशसे पृथ्वीपर जन्म लेनेका आदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.64.2 
यदर्थमिह सम्भूता देवकल्पा महारथा:।
भुवि तन्मे महाभाग सम्यगाख्यातुमर्हसि॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे महात्मन! कृपया विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए कि उस देवतुल्य योद्धा का इस पृथ्वी पर जन्म किस उद्देश्य से हुआ है ॥2॥
 
O great one! Please describe in detail the purpose for which that god-like warrior was born on this earth. ॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)