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mahabharat 1.63.d3: दाशराज ने पूछा - "पुत्री! लोग तुम्हें 'मत्स्यगंधा' कहते थे क्योंकि तुम्हारे शरीर से मछली जैसी गंध आती थी, फिर यह सुगंध तुम्हें कहाँ से मिली? किसने इस मछली जैसी गंध को दूर करके तुम्हारे शरीर में सुगंध भर दी है?"   |   mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  1.63.d3 
दाश उवाच
(त्वामाहुर्मत्स्यगन्धेति कथं बाले सुगन्धता।
अपास्य मत्स्यगन्धत्वं केन दत्ता सुगन्धता॥ )
 
 
अनुवाद
दाशराज ने पूछा - "पुत्री! लोग तुम्हें 'मत्स्यगंधा' कहते थे क्योंकि तुम्हारे शरीर से मछली जैसी गंध आती थी, फिर यह सुगंध तुम्हें कहाँ से मिली? किसने इस मछली जैसी गंध को दूर करके तुम्हारे शरीर में सुगंध भर दी है?"
 
Dashraj asked - Daughter! People used to call you 'Matsyagandha' because your body smelled like fish, then where did you get this fragrance from? Who has removed this fishy smell and given fragrance to your body?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)