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mahabharat 1.63.d1-d2h: तत्पश्चात सत्यवती प्रसन्नतापूर्वक अपने घर चली गई। उस दिन से संसार के लोग एक योजन दूर से ही उसकी दिव्य सुगंध का अनुभव करने लगे। उसके पिता दाशराज भी उसकी सुगंध पाकर अत्यंत प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक d1-d2h
 
 
श्लोक  1.63.d1-d2h 
(तत: सत्यवती हृष्टा जगाम स्वं निवेशनम्।
तस्यास्त्वायोजनाद् गन्धमाजिघ्रन्ति नरा भुवि॥
दाशराजस्तु तद्‍गन्धमाजिघ्रन् प्रीतिमावहत्।)
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात सत्यवती प्रसन्नतापूर्वक अपने घर चली गई। उस दिन से संसार के लोग एक योजन दूर से ही उसकी दिव्य सुगंध का अनुभव करने लगे। उसके पिता दाशराज भी उसकी सुगंध पाकर अत्यंत प्रसन्न हुए।
 
Thereafter Satyavati went to her home happily. From that day onwards people of the world started feeling her divine fragrance from a distance of one yojana. Her father Dashraj also became very happy after smelling her fragrance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)