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mahabharat 1.63.98: महाबली कर्ण राजा कुन्तीभोज की पुत्री कुन्ती के गर्भ से सूर्य के अंश से उत्पन्न हुआ था। वह बालक जन्म से ही कवच-कुण्डल धारण किए हुए था। उसका मुख उसके शरीर के साथ उत्पन्न हुए कुण्डलों के तेज से प्रकाशित हो रहा था।॥98॥   |   mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  1.63.98 
सूर्याच्च कुन्तिकन्याया जज्ञे कर्णो महाबल:।
सहजं कवचं बिभ्रत् कुण्डलो द्योतितानन:॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
महाबली कर्ण राजा कुन्तीभोज की पुत्री कुन्ती के गर्भ से सूर्य के अंश से उत्पन्न हुआ था। वह बालक जन्म से ही कवच-कुण्डल धारण किए हुए था। उसका मुख उसके शरीर के साथ उत्पन्न हुए कुण्डलों के तेज से प्रकाशित हो रहा था।॥98॥
 
Mahabali Karna was born from the womb of Kunti, daughter of King Kunti Bhoja, from a part of the Sun. That child was wearing armour right from birth. His face was illuminated by the radiance of the Kundalas that were born along with his body.॥98॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)