श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  1.63.94 
इषीकया मया बाल्याद् विद्धा ह्येका शकुन्तिका।
तत् किल्बिषं स्मरे धर्म नान्यत् पापमहं स्मरे॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज! एक समय मैंने बाल्यावस्था के कारण एक पक्षी के बच्चे को तिनके से छेद दिया था। बस यही एक पाप मुझे स्मरण है। इसके अतिरिक्त मुझे कोई अन्य पाप स्मरण नहीं है॥ 94॥
 
‘Dharamraj! Once upon a time, due to my childhood, I had pierced a baby bird with a straw. That is the only sin I can remember. I do not remember any other sin of mine.॥ 94॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)