Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.63.92-93: प्राचीन समय की बात है कि वेदों के ज्ञाता, महाप्रतापी, प्राचीन ऋषि, ब्रह्मर्षि भगवान् अणिमाण्डव्य चोर न होते हुए भी चोर होने के संदेह में सूली पर चढ़ा दिए गए थे। परलोक में जाकर उन महामुनि महर्षि ने सबसे पहले धर्म को पुकारा और इस प्रकार कहा - 92-93॥ | mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वेदार्थविच्च भगवानृषिर्विप्रो महायशा:।
शूले प्रोत: पुराणर्षिरचौरश्चौरशङ्कया॥ ९२॥
अणीमाण्डव्य इत्येवं विख्यात: स महायशा:।
स धर्ममाहूय पुरा महर्षिरिदमुक्तवान्॥ ९३॥
अनुवाद
प्राचीन समय की बात है कि वेदों के ज्ञाता, महाप्रतापी, प्राचीन ऋषि, ब्रह्मर्षि भगवान् अणिमाण्डव्य चोर न होते हुए भी चोर होने के संदेह में सूली पर चढ़ा दिए गए थे। परलोक में जाकर उन महामुनि महर्षि ने सबसे पहले धर्म को पुकारा और इस प्रकार कहा - 92-93॥
It is a matter of ancient times that the expert of the Vedas, the great illustrious sage, the ancient sage, the Brahmarshi Lord Animandavya, despite not being a thief, was crucified on the suspicion of being a thief. After going to the next world, that great sage Maharishi first called Dharma and said thus - 92-93॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥