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mahabharat 1.63.85: उन्होंने अपनी माता से कहा, "जब भी तुम्हें मेरी आवश्यकता हो, मुझे स्मरण करना। मैं अवश्य तुम्हारे समक्ष प्रकट होऊँगा।" ऐसा कहकर तथा अपनी माता की अनुमति लेकर व्यासजी ने तपस्या में मन लगा लिया।   |   mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  1.63.85 
स मातरमनुज्ञाप्य तपस्येव मनो दधे।
स्मृतोऽहं दर्शयिष्यामि कृत्येष्विति च सोऽब्रवीत्॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपनी माता से कहा, "जब भी तुम्हें मेरी आवश्यकता हो, मुझे स्मरण करना। मैं अवश्य तुम्हारे समक्ष प्रकट होऊँगा।" ऐसा कहकर तथा अपनी माता की अनुमति लेकर व्यासजी ने तपस्या में मन लगा लिया।
 
He told his mother, "Whenever you need me, remember me. I will certainly appear before you." Having said this and taking his mother's permission, Vyasa concentrated on penance. 85.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)