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mahabharat 1.63.83-84: इस प्रकार उत्तम वर पाकर हर्ष से परिपूर्ण सत्यवती ने महर्षि पराशर का संयोग प्राप्त किया और तत्काल ही एक बालक को जन्म दिया। यमुना के द्वीप पर परम पराक्रमी पराशर के पुत्र व्यास प्रकट हुए। 83-84।   |   mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 83-84
 
 
श्लोक  1.63.83-84 
इति सत्यवती हृष्टा लब्ध्वा वरमनुत्तमम्॥ ८३॥
पराशरेण संयुक्ता सद्यो गर्भं सुषाव सा।
जज्ञे च यमुनाद्वीपे पाराशर्य: स वीर्यवान्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उत्तम वर पाकर हर्ष से परिपूर्ण सत्यवती ने महर्षि पराशर का संयोग प्राप्त किया और तत्काल ही एक बालक को जन्म दिया। यमुना के द्वीप पर परम पराक्रमी पराशर के पुत्र व्यास प्रकट हुए। 83-84।
 
Thus, Satyavati, filled with joy after getting the best groom, got the union of Maharishi Parashara and immediately gave birth to a child. The extremely powerful Parashara's son Vyasa appeared on the island of Yamuna. 83-84.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)