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mahabharat 1.63.8-12: इस समय चेदि देश प्राणियों के लिए हितकारी, पुण्यों का भंडार, प्रचुर धन-धान्य से युक्त, स्वर्ग के समान सुखदायक, रक्षणीय, सौम्य, भक्ष्य पदार्थों से युक्त तथा उत्तम गुणों से युक्त है। यह देश अनेक वस्तुओं से युक्त तथा धन-रत्न आदि से युक्त है। यहाँ की पृथ्वी वास्तव में वसुओं (धन-सम्पत्ति) से परिपूर्ण है। अतः आप चेदि देश के रक्षक होकर इसमें निवास करें। इस देश के लोग धार्मिक, संतोषी और साधु हैं। यहाँ तो कोई हंसी-मजाक में भी झूठ नहीं बोलता, फिर अन्य अवसरों पर कैसे झूठ बोल सकता है। पुत्र सदैव अपने बड़ों के हित में लगे रहते हैं, पिता जीवित रहते हुए अपनी संपत्ति का बँटवारा नहीं करते। यहाँ के लोग बैलों से बोझा नहीं ढोते और गरीबों तथा अनाथों का पालन-पोषण नहीं करते। मान्यवर! चेदि देश में सभी जातियों के लोग अपने-अपने धर्म में सदैव दृढ़ रहते हैं। तीनों लोकों में जो कुछ भी घटित होता है, वह आपके यहाँ रहते हुए भी आपसे छिपा नहीं रहेगा - आप सर्वज्ञ बने रहेंगे। 8-12।   |   mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 8-12
 
 
श्लोक  1.63.8-12 
पशव्यश्चैव पुण्यश्च प्रभूतधनधान्यवान्।
स्वारक्ष्यश्चैव सौम्यश्च भोग्यैर्भूमिगुणैर्युत:॥ ८॥
अर्थवानेष देशो हि धनरत्नादिभिर्युत:।
वसुपूर्णा च वसुधा वस चेदिषु चेदिप॥ ९॥
धर्मशीला जनपदा: सुसंतोषाश्च साधव:।
न च मिथ्याप्रलापोऽत्र स्वैरेष्वपि कुतोऽन्यथा॥ १०॥
न च पित्रा विभज्यन्ते पुत्रा गुरुहिते रता:।
युञ्जते धुरि नो गाश्च कृशान् संधुक्षयन्ति च॥ ११॥
सर्वे वर्णा: स्वधर्मस्था: सदा चेदिषु मानद।
न तेऽस्त्यविदितं किंचित् त्रिषु लोकेषु यद् भवेत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इस समय चेदि देश प्राणियों के लिए हितकारी, पुण्यों का भंडार, प्रचुर धन-धान्य से युक्त, स्वर्ग के समान सुखदायक, रक्षणीय, सौम्य, भक्ष्य पदार्थों से युक्त तथा उत्तम गुणों से युक्त है। यह देश अनेक वस्तुओं से युक्त तथा धन-रत्न आदि से युक्त है। यहाँ की पृथ्वी वास्तव में वसुओं (धन-सम्पत्ति) से परिपूर्ण है। अतः आप चेदि देश के रक्षक होकर इसमें निवास करें। इस देश के लोग धार्मिक, संतोषी और साधु हैं। यहाँ तो कोई हंसी-मजाक में भी झूठ नहीं बोलता, फिर अन्य अवसरों पर कैसे झूठ बोल सकता है। पुत्र सदैव अपने बड़ों के हित में लगे रहते हैं, पिता जीवित रहते हुए अपनी संपत्ति का बँटवारा नहीं करते। यहाँ के लोग बैलों से बोझा नहीं ढोते और गरीबों तथा अनाथों का पालन-पोषण नहीं करते। मान्यवर! चेदि देश में सभी जातियों के लोग अपने-अपने धर्म में सदैव दृढ़ रहते हैं। तीनों लोकों में जो कुछ भी घटित होता है, वह आपके यहाँ रहते हुए भी आपसे छिपा नहीं रहेगा - आप सर्वज्ञ बने रहेंगे। 8-12।
 
At this time, the Chedi country is beneficial for animals, is a source of virtues, is rich in abundant wealth and grains, is as pleasant as heaven, is worth protecting, is mild and is full of edible things and the best qualities of the land. This country is full of many things and is rich in wealth and gems etc. The earth here is really full of Vasu (wealth and property). Therefore, you should reside in it as the protector of the Chedi country. The people of this country are religious, contented and saintly. Here, no one lies even in fun and jokes, then how can they lie on other occasions. Sons are always engaged in the welfare of their elders, fathers do not divide their wealth while they are alive. People here do not use oxen to carry loads and nourish the poor and orphans. Honorable! In the Chedi country, people of all castes always remain steadfast in their respective religions. Whatever happens in the three worlds, it will not remain hidden from you even while you are here - you will remain omniscient. 8–12.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)