Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.63.78-79: सत्यवती की यह बात सुनकर महर्षि पराशर प्रसन्न हुए और बोले - 'भीरु! मेरा प्रिय कार्य करने पर भी तुम कुमारी ही रहोगी। भामिनी! मुझसे जो चाहो वर मांग लो। शुचिस्मिते! इससे पहले कभी मेरी कृपा व्यर्थ नहीं गई।'॥ 78-79॥ | mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवमुक्तवतीं तां तु प्रीतिमानृषिसत्तम:।
उवाच मत्प्रियं कृत्वा कन्यैव त्वं भविष्यसि॥ ७८॥
वृणीष्व च वरं भीरु यं त्वमिच्छसि भामिनि।
वृथा हि न प्रसादो मे भूतपूर्व: शुचिस्मिते॥ ७९॥
अनुवाद
सत्यवती की यह बात सुनकर महर्षि पराशर प्रसन्न हुए और बोले - 'भीरु! मेरा प्रिय कार्य करने पर भी तुम कुमारी ही रहोगी। भामिनी! मुझसे जो चाहो वर मांग लो। शुचिस्मिते! इससे पहले कभी मेरी कृपा व्यर्थ नहीं गई।'॥ 78-79॥
On hearing Satyavati say this, the great sage Parashar became pleased and said, 'Bhiru! Even after doing my favourite work, you will remain a virgin. Bhaamini! Ask for any boon you want from me. Shuchismite! Never before has my grace gone in vain'॥ 78-79॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥