Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.63.76-77: निष्पाप महर्षि! आपके संसर्ग से मेरा कौमार्य (कौमार्य) भ्रष्ट हो जाएगा। द्विजश्रेष्ठ! यदि मेरा कौमार्य कलंकित हो गया तो मैं घर कैसे जाऊँगी? बुद्धिमान् मुनीश्वर! यदि मेरा कौमार्य कलंकित हो गया तो मैं जीना नहीं चाहती। प्रभु! इस विषय में भली-भाँति विचार कीजिए और जो उचित समझो, वही कीजिए। 76-77॥ | mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निष्पाप महर्षि! आपके संसर्ग से मेरा कौमार्य (कौमार्य) भ्रष्ट हो जाएगा। द्विजश्रेष्ठ! यदि मेरा कौमार्य कलंकित हो गया तो मैं घर कैसे जाऊँगी? बुद्धिमान् मुनीश्वर! यदि मेरा कौमार्य कलंकित हो गया तो मैं जीना नहीं चाहती। प्रभु! इस विषय में भली-भाँति विचार कीजिए और जो उचित समझो, वही कीजिए। 76-77॥
Sinless Maharishi! My virginity (virginity) will get corrupted due to your association. Dwijshreshtha! How can I go home if my virginity is tainted? Wise Munishwar! I don't want to live if my girlhood gets tarnished. Lord! Think about this matter carefully and do whatever seems right. 76-77॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥