Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.63.71: उसकी मुस्कान अत्यंत मनमोहक थी, उसकी जांघें केले के समान सुन्दर थीं। उस दिव्य वसुकुमारी को देखकर परम बुद्धिमान ऋषि पराशर ने उसके साथ समागम की इच्छा व्यक्त की। 71। | mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दृष्ट्वैव स च तां धीमांश्चकमे चारुहासिनीम्।
दिव्यां तां वासवीं कन्यां रम्भोरुं मुनिपुङ्गव:॥ ७१॥
अनुवाद
उसकी मुस्कान अत्यंत मनमोहक थी, उसकी जांघें केले के समान सुन्दर थीं। उस दिव्य वसुकुमारी को देखकर परम बुद्धिमान ऋषि पराशर ने उसके साथ समागम की इच्छा व्यक्त की। 71।
Her smile was very charming, her thighs were as beautiful as bananas. Seeing that divine Vasu Kumari, the most intelligent sage Parashara expressed his desire to have intercourse with her. 71.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥