Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.63.68-70: सौन्दर्य और सत्य (सत्व) से युक्त तथा समस्त सद्गुणों से युक्त होने के कारण वह सत्यवती नाम से विख्यात हुई। मछुआरों के आश्रय में रहने के कारण वह पवित्र और हँसमुख कन्या कुछ समय तक मत्स्यगंधा नाम से विख्यात हुई। वह अपने पिता की सेवा हेतु यमुना के जल में नाव चलाया करती थी। एक दिन तीर्थयात्रा के उद्देश्य से सर्वत्र भ्रमण कर रहे महर्षि पराशर ने उसे देखा। वह अत्यंत सुन्दर थी। सिद्धों को भी उसे प्राप्त करने की इच्छा हुई। | mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सौन्दर्य और सत्य (सत्व) से युक्त तथा समस्त सद्गुणों से युक्त होने के कारण वह सत्यवती नाम से विख्यात हुई। मछुआरों के आश्रय में रहने के कारण वह पवित्र और हँसमुख कन्या कुछ समय तक मत्स्यगंधा नाम से विख्यात हुई। वह अपने पिता की सेवा हेतु यमुना के जल में नाव चलाया करती थी। एक दिन तीर्थयात्रा के उद्देश्य से सर्वत्र भ्रमण कर रहे महर्षि पराशर ने उसे देखा। वह अत्यंत सुन्दर थी। सिद्धों को भी उसे प्राप्त करने की इच्छा हुई।
Being endowed with beauty and truth (satva) and being endowed with all the good qualities, she became famous by the name Satyavati. Due to living under the shelter of fishermen, that pure and smiling girl was known by the name Matsyagandha for some time. She used to row a boat in the waters of Yamuna to serve her father. One day Maharishi Parashar, who was roaming everywhere for the purpose of pilgrimage, saw her. She was extremely beautiful. Even the Siddhas had a desire to possess her.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥