Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.63.64-66: यहाँ शुभ अप्सरा अद्रिका क्षण भर में ही श्राप से मुक्त हो गई। ब्रह्मा जी ने उसे पहले ही बता दिया था कि 'तुम जो स्त्री रूप में हो, दो मानव संतानों को जन्म देकर श्राप से मुक्त हो जाओगी।' अतः जब मछुआरे ने उसे काटा, तो उसने मानव संतानों को जन्म दिया और मत्स्य रूप त्यागकर दिव्य रूप प्राप्त किया। इस प्रकार वह सुंदर अप्सरा सिद्ध महर्षियों और चारणों के मार्ग से स्वर्ग को गई। | mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यहाँ शुभ अप्सरा अद्रिका क्षण भर में ही श्राप से मुक्त हो गई। ब्रह्मा जी ने उसे पहले ही बता दिया था कि 'तुम जो स्त्री रूप में हो, दो मानव संतानों को जन्म देकर श्राप से मुक्त हो जाओगी।' अतः जब मछुआरे ने उसे काटा, तो उसने मानव संतानों को जन्म दिया और मत्स्य रूप त्यागकर दिव्य रूप प्राप्त किया। इस प्रकार वह सुंदर अप्सरा सिद्ध महर्षियों और चारणों के मार्ग से स्वर्ग को गई।
Here the auspicious Apsara Adrika was freed from the curse in a moment. Lord Brahma had already told her that 'You who are in the female form of a woman will be freed from the curse by giving birth to two human children.' So when the fisherman cut her, she gave birth to human children and left the fish form and attained a divine form. In this way that beautiful Apsara went to heaven through the path of Siddha Maharshi and Charanas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥