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mahabharat 1.63.56: वह उड़ता हुआ पक्षी बड़े वेग से उड़ रहा था, तभी अचानक एक अन्य पक्षी ने उसे आते देखा ॥56॥   |   mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  1.63.56 
जवं परममास्थाय प्रदुद्राव विहंगम:।
तमपश्यदथायान्तं श्येनं श्येनस्तथापर:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
वह उड़ता हुआ पक्षी बड़े वेग से उड़ रहा था, तभी अचानक एक अन्य पक्षी ने उसे आते देखा ॥56॥
 
That flying bird was flying with great speed, when suddenly another bird saw him coming. ॥56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)