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mahabharat 1.63.50: जैसे ही उसका वीर्यपात हुआ, राजा ने यह सोचकर कि उसका वीर्य व्यर्थ न जाए, उसे एक वृक्ष के पत्ते पर उठा लिया।   |   mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  1.63.50 
स्कन्नमात्रं च तद् रेतो वृक्षपत्रेण भूमिप:।
प्रतिजग्राह मिथ्या मे न पतेद् रेत इत्युत॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही उसका वीर्यपात हुआ, राजा ने यह सोचकर कि उसका वीर्य व्यर्थ न जाए, उसे एक वृक्ष के पत्ते पर उठा लिया।
 
As soon as he ejaculated, the king, thinking that his semen should not go to waste, picked him up on a leaf of a tree. 50.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)