Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.63.5: देवताओं ने कहा - हे पृथ्वी के स्वामी! आपको ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि इस पृथ्वी पर जातियों का मेल-मिलाप न फैले (आपके न रहने पर अराजकता फैलने का भय है, जिससे प्रजा अपने-अपने धर्म में दृढ़ न रह सकेगी। अतः आप तपस्या न करके इस पृथ्वी की रक्षा करें)। राजन! आपके द्वारा रक्षित धर्म ही सम्पूर्ण जगत को धारण किए हुए है॥5॥ | mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवा ऊचु:
न संकीर्येत धर्मोऽयं पृथिव्यां पृथिवीपते।
त्वया हि धर्मो विधृत: कृत्स्नं धारयते जगत्॥ ५॥
अनुवाद
देवताओं ने कहा - हे पृथ्वी के स्वामी! आपको ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि इस पृथ्वी पर जातियों का मेल-मिलाप न फैले (आपके न रहने पर अराजकता फैलने का भय है, जिससे प्रजा अपने-अपने धर्म में दृढ़ न रह सकेगी। अतः आप तपस्या न करके इस पृथ्वी की रक्षा करें)। राजन! आपके द्वारा रक्षित धर्म ही सम्पूर्ण जगत को धारण किए हुए है॥5॥
The gods said - O lord of the earth! You should make such efforts that the mixing of castes does not spread on this earth (there is a fear of anarchy spreading in your absence, due to which the people will not be able to remain steadfast in their own religion. Therefore, instead of doing penance, you should protect this earth). King! The religion protected by you is the only thing that is sustaining the entire world. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥