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mahabharat 1.63.49: उस समय कामोद्दीपक वायु से प्रेरित होकर राजा के मन में स्त्रियों के साथ मैथुन करने की इच्छा उत्पन्न हो गई। इस प्रकार वन में विचरण करते हुए राजा उपरिचर ने अपना वीर्य स्खलित कर दिया ॥ 49॥   |   mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  1.63.49 
वायुना प्रेर्यमाणस्तु धूम्राय मुदमन्वगात् ।
तस्य रेत: प्रचस्कन्द चरतो गहने वने॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
उस समय कामोद्दीपक वायु से प्रेरित होकर राजा के मन में स्त्रियों के साथ मैथुन करने की इच्छा उत्पन्न हो गई। इस प्रकार वन में विचरण करते हुए राजा उपरिचर ने अपना वीर्य स्खलित कर दिया ॥ 49॥
 
At that time, inspired by the aphrodisiac wind, the king developed a desire for women for sexual intercourse. Thus, King Uparichara, who was wandering in the forest, ejaculated his semen. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)