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mahabharat 1.63.35: उनकी राजधानी के निकट शुक्तिमती नदी बहती थी। एक बार कोलाहल नामक चेतन पर्वत ने कामवश उस दिव्य नदी को रोक दिया। 35.   |   mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.63.35 
पुरोपवाहिनीं तस्य नदीं शुक्तिमतीं गिरि:।
अरौत्सीच्चेतनायुक्त: कामात् कोलाहल: किल॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उनकी राजधानी के निकट शुक्तिमती नदी बहती थी। एक बार कोलाहल नामक चेतन पर्वत ने कामवश उस दिव्य नदी को रोक दिया। 35.
 
The river Suktimathi flowed near his capital. Once a conscious mountain named Kolahal, out of lust, stopped that divine river. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)