श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.63.31 
प्रत्यग्रह: कुशाम्बश्च यमाहुर्मणिवाहनम्।
मावेल्लश्च यदुश्चैव राजन्यश्चापराजित:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
दूसरे पुत्र का नाम प्रत्याग्रह था, तीसरे का नाम कुशम्भ था, जिसे मणिवाहन भी कहते हैं। चौथे का नाम मावेल था। पाँचवाँ राजकुमार यदु था, जो युद्ध में कभी किसी से पराजित नहीं हुआ।
 
The name of the second son was Pratyagrah, the third was Kushamba, who is also called Manivahan. The fourth was Mavel. The fifth prince was Yadu, who was never defeated by anyone in war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)