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mahabharat 1.63.29: इन्द्र को प्रसन्न करने के लिए चेदिराज वसु प्रतिवर्ष इन्द्रोत्सव मनाते थे। उनके पाँच पुत्र थे जो अनन्त पराक्रमी और पराक्रमी थे। 29॥   |   mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.63.29 
इन्द्रप्रीत्या चेदिपतिश्चकारेन्द्रमहं वसु:।
पुत्राश्चास्य महावीर्या: पञ्चासन्नमितौजस:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र को प्रसन्न करने के लिए चेदिराज वसु प्रतिवर्ष इन्द्रोत्सव मनाते थे। उनके पाँच पुत्र थे जो अनन्त पराक्रमी और पराक्रमी थे। 29॥
 
To please Indra, Chediraj Vasu used to celebrate Indrotsav every year. He had five sons who were infinitely powerful and mighty. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)