Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.63.25-27: 'केवल इतना ही नहीं, उसका सम्पूर्ण जनपद उत्तरोत्तर उन्नतिशील और सुखी हो जाएगा।' राजन! इस प्रकार महात्मा महेन्द्र ने, जो मघव नाम से भी प्रसिद्ध हैं, महाराज वसुका के साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार किया। जो मनुष्य भूमि और रत्न आदि का दान करके भगवान इन्द्र को सदैव प्रसन्न करेंगे, वे इन्द्रोत्सर्ग द्वारा इन्द्र का वर प्राप्त करेंगे और उसी उत्तम गति को प्राप्त होंगे, जो भूमि आदि दान करने वाले पुण्यवान मनुष्यों को प्राप्त होती है। 25-27॥ | mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथा स्फीतो जनपदो मुदितश्च भविष्यति।
एवं महात्मना तेन महेन्द्रेण नराधिप॥ २५॥
वसु: प्रीत्या मघवता महाराजोऽभिसत्कृत:।
उत्सवं कारयिष्यन्ति सदा शक्रस्य ये नरा:॥ २६॥
भूमिरत्नादिभिर्दानैस्तथा पूज्या भवन्ति ते।
वरदानमहायज्ञैस्तथा शक्रोत्सवेन च॥ २७॥
अनुवाद
'केवल इतना ही नहीं, उसका सम्पूर्ण जनपद उत्तरोत्तर उन्नतिशील और सुखी हो जाएगा।' राजन! इस प्रकार महात्मा महेन्द्र ने, जो मघव नाम से भी प्रसिद्ध हैं, महाराज वसुका के साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार किया। जो मनुष्य भूमि और रत्न आदि का दान करके भगवान इन्द्र को सदैव प्रसन्न करेंगे, वे इन्द्रोत्सर्ग द्वारा इन्द्र का वर प्राप्त करेंगे और उसी उत्तम गति को प्राप्त होंगे, जो भूमि आदि दान करने वाले पुण्यवान मनुष्यों को प्राप्त होती है। 25-27॥
'Not only this, his entire district will become progressively progressive and happy.' Rajan! In this way, Mahatma Mahendra, who is also known as Maghva, lovingly treated Maharaj Vasuka. Those people who will always celebrate Lord Indra by donating land and gems etc., they will get the boon of Indra through the festival of Indro and will attain the same good state which is achieved by the people who have the virtues of donating land etc. 25-27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥