Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.63.22-24: इंद्र ने महर्षि वसुका के प्रेमवश स्वयं हंस का रूप धारण कर पूजा स्वीकार की। महर्षि वसुका द्वारा की गई शुभ पूजा को देखकर शक्तिशाली भगवान महेंद्र प्रसन्न हुए और बोले, 'जिस प्रकार चेदि देश के अधिपति उपरिचर वसु मेरी पूजा करते हैं, उसी प्रकार जो पुरुष और राजा मेरी पूजा करेंगे और मेरा यह उत्सव मनाएंगे, उन्हें तथा उनके समस्त राष्ट्र को धन और विजय की प्राप्ति होगी।' | mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इंद्र ने महर्षि वसुका के प्रेमवश स्वयं हंस का रूप धारण कर पूजा स्वीकार की। महर्षि वसुका द्वारा की गई शुभ पूजा को देखकर शक्तिशाली भगवान महेंद्र प्रसन्न हुए और बोले, 'जिस प्रकार चेदि देश के अधिपति उपरिचर वसु मेरी पूजा करते हैं, उसी प्रकार जो पुरुष और राजा मेरी पूजा करेंगे और मेरा यह उत्सव मनाएंगे, उन्हें तथा उनके समस्त राष्ट्र को धन और विजय की प्राप्ति होगी।'
Indra, out of love for the great Vasuka, himself assumed the form of a swan and accepted the worship. Seeing the auspicious worship performed by the great king Vasuka, the powerful Lord Mahendra became pleased and said, 'The way Uparichara Vasu, the ruler of Chedi country, worships me, in the same way, the men and kings who worship me and celebrate this festival of mine will attain wealth and victory to them and their entire nation.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥