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mahabharat 1.63.17: ऐसा कहकर वृत्रासुर का संहार करने वाले इन्द्र ने राजा को प्रेमपूर्वक एक बाँस भेंट किया, जो शीलवान पुरुषों की रक्षा करता है ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.63.17 
यष्टिं च वैणवीं तस्मै ददौ वृत्रनिषूदन:।
इष्टप्रदानमुद्दिश्य शिष्टानां प्रतिपालिनीम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर वृत्रासुर का संहार करने वाले इन्द्र ने राजा को प्रेमपूर्वक एक बाँस भेंट किया, जो शीलवान पुरुषों की रक्षा करता है ॥17॥
 
Having said this, Indra, the destroyer of Vritraasura, presented to the King as a gift of love a bamboo stick, which protects courteous men. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)