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mahabharat 1.63.14: तुम ही समस्त मनुष्यों में एकमात्र इस महान विमान पर बैठकर मूर्तिरूपी देवता की भाँति सबके ऊपर मंडराओगे॥14॥   |   mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.63.14 
त्वमेक: सर्वमर्त्येषु विमानवरमास्थित:।
चरिष्यस्युपरिस्थो हि देवो विग्रहवानिव॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तुम ही समस्त मनुष्यों में एकमात्र इस महान विमान पर बैठकर मूर्तिरूपी देवता की भाँति सबके ऊपर मंडराओगे॥14॥
 
You, the only one among all human beings, will sit on this great aircraft and will hover above everyone like an idol-like deity. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)