श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 125
 
 
श्लोक  1.63.125 
शिखण्डी द्रुपदाज्जज्ञे कन्या पुत्रत्वमागता।
यां यक्ष: पुरुषं चक्रे स्थूण: प्रियचिकीर्षया॥ १२५॥
 
 
अनुवाद
राजा द्रुपद की शिखण्डी नाम की एक कन्या थी, जो बाद में पुत्ररूप में परिणत हुई। स्थूनाकर्ण नामक यक्ष ने उसे प्रसन्न करने की इच्छा से पुरुष बना दिया था ॥125॥
 
King Drupada had a daughter named Shikhandi, who later transformed into a son. A Yaksha named Sthunakarna had made him a man with the desire to please her. 125॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)