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भरद्वाजस्य च स्कन्नं द्रोण्यां शुक्रमवर्धत।
महर्षेरुग्रतपसस्तस्माद् द्रोणो व्यजायत॥ १०६॥
अनुवाद
एक समय घोर तपस्वी महर्षि भरद्वाज का वीर्य एक गर्त (पहाड़ की गुफा) में स्खलित हो गया और धीरे-धीरे बढ़ने लगा। उसी से द्रोण उत्पन्न हुए ॥106॥
Once, the semen of the fierce ascetic Maharishi Bharadwaj was ejaculated into a trough (mountain cave) and slowly started growing. From that, Drona was born.॥106॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥