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mahabharat 1.63.104: उन्होंने ही धर्म की वृद्धि के लिए अंधक और वृष्णि कुल में बलराम और श्रीकृष्ण का रूप धारण किया था। वे दोनों भाई समस्त अस्त्र-शस्त्रों में निपुण, अत्यंत पराक्रमी और समस्त शास्त्रों के ज्ञाता थे॥104॥   |   mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  1.63.104 
धर्मसंवर्धनार्थाय प्रजज्ञेऽन्धकवृष्णिषु।
अस्त्रज्ञौ तु महावीर्यौ सर्वशास्त्रविशारदौ॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने ही धर्म की वृद्धि के लिए अंधक और वृष्णि कुल में बलराम और श्रीकृष्ण का रूप धारण किया था। वे दोनों भाई समस्त अस्त्र-शस्त्रों में निपुण, अत्यंत पराक्रमी और समस्त शास्त्रों के ज्ञाता थे॥104॥
 
He himself had taken the form of Balarama and Sri Krishna in the Andhaka and Vrishni clans for the growth of religion. Both the brothers were experts in all the weapons, were extremely valiant and had the knowledge of all the scriptures.॥104॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)