Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.63.101-103: आत्मा, अव्यय, प्रकृति, प्रभाव, प्रभु, पुरुष, विश्वकर्मा, सत्त्वगुण और प्रणवाक्षर से प्राप्त होने वाला भी वही है; उसे अनादि, अचल, ईश्वर, हंस, नारायण, प्रभु, धाता, अजन्मा, अव्यक्त, परा, अव्यय, कैवल्य, निर्गुण, विश्वरूप, नित्य, अजन्मा और अविनाशी कहा गया है। वह सर्वव्यापी, परब्रह्म परमात्मा, सबका रचयिता और समस्त प्राणियों का पितामह है। 101—103॥ | mahabharat अध्याय 1.63: राजा उपरिचरका चरित्र तथा सत्यवती, व्यासादि प्रमुख पात्रोंकी संक्षिप्त जन्मकथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आत्मा, अव्यय, प्रकृति, प्रभाव, प्रभु, पुरुष, विश्वकर्मा, सत्त्वगुण और प्रणवाक्षर से प्राप्त होने वाला भी वही है; उसे अनादि, अचल, ईश्वर, हंस, नारायण, प्रभु, धाता, अजन्मा, अव्यक्त, परा, अव्यय, कैवल्य, निर्गुण, विश्वरूप, नित्य, अजन्मा और अविनाशी कहा गया है। वह सर्वव्यापी, परब्रह्म परमात्मा, सबका रचयिता और समस्त प्राणियों का पितामह है। 101—103॥
Soul, Avyaya, Prakriti (Substance), Prabhava (Origin-reason), Prabhu (Lord), Purusha (Antaryami), Vishwakarma, attainable from Sattva Guna and Pranavakshar are also the same; He has been called eternal, immovable, god, swan, Narayan, Lord, dhata, unborn, unexpressed, para, avyaya, kaivalya, nirgun, world form, eternal, birthless and imperishable. He is the omnipresent, supreme Supreme Soul, the creator of all and the grandfather of all beings. 101—103॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥