Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.62.9: धर्म के पुत्र, धर्मात्माओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर धर्म के ज्ञाता थे और वे कभी भी महान क्लेश सहने के योग्य नहीं थे। उन्होंने यह सब कैसे सहा?॥9॥ | mahabharat अध्याय 1.62: । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं धर्मभृतां श्रेष्ठ: सुतो धर्मस्य धर्मवित्।
अनर्ह: परमं क्लेशं सोढवान् स युधिष्ठिर:॥ ९॥
अनुवाद
धर्म के पुत्र, धर्मात्माओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर धर्म के ज्ञाता थे और वे कभी भी महान क्लेश सहने के योग्य नहीं थे। उन्होंने यह सब कैसे सहा?॥9॥
Yudhishthira, the son of Dharma, the best of the righteous, was a knower of Dharma and was never fit to undergo great tribulation. How did he endure all that?॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥