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mahabharat 1.62.53: हे भरतश्रेष्ठ! इस ग्रन्थ में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के सम्बन्ध में जो कुछ है, वह अन्यत्र भी है। जो इस ग्रन्थ में नहीं है, वह अन्यत्र भी नहीं है ॥ 53॥   |   mahabharat अध्याय 1.62:   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.62.53 
धर्मे चार्थे च कामे च मोक्षे च भरतर्षभ।
यदिहास्ति तदन्यत्र यन्नेहास्ति न तत् क्वचित्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! इस ग्रन्थ में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के सम्बन्ध में जो कुछ है, वह अन्यत्र भी है। जो इस ग्रन्थ में नहीं है, वह अन्यत्र भी नहीं है ॥ 53॥
 
O best of the Bharatas! Whatever is there in this book regarding Dharma, Artha, Kama and Moksha, is there elsewhere also. What is not there in this book is not there anywhere else. ॥ 53॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि अंशावतरणपर्वणि महाभारतप्रशंसायां द्विषष्टितमोऽध्याय:॥ ६२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत अंशावतरणपर्वमें महाभारतप्रशंसाविषयक बासठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६२॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ११ श्लोक मिलाकर कुल ६४ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)