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mahabharat 1.61.d2-45h: उसी समय उन्होंने पवित्र तीर्थस्थानों की यात्रा की और नागकन्या उलूपी को पाकर पाण्डुराज चित्रवाहन की पुत्री चित्रांगदा को भी प्राप्त किया और उन दोनों के साथ उन स्थानों में कुछ समय तक निवास किया। तत्पश्चात, किसी समय वे द्वारका में भगवान श्रीकृष्ण के पास गए। वहाँ अर्जुन ने शुभ वचन बोलने वाली कामललोचना सुभद्रा को अपनी पत्नी बनाया, जो वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण की छोटी बहन थीं। जैसे शची इन्द्र के साथ और लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ एकाकार हो गईं, वैसे ही सुभद्रा बड़े प्रेम से पाण्डुनन्दन अर्जुन के साथ एकाकार हो गईं। 43-44 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 1.61: कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 61: कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश  »  श्लोक d2-45h
 
 
श्लोक  1.61.d2-45h 
(तीर्थयात्रां च कृतवान् नागकन्यामवाप्य च।
पाण्डॺस्य तनयां लब्ध्वा तत्र ताभ्यां सहोषित:॥ )
ततोऽगच्छद्‍धृषीकेशं द्वारवत्यां कदाचन।
लब्धवांस्तत्र बीभत्सुर्भार्यां राजीवलोचनाम्॥ ४३॥
अनुजां वासुदेवस्य सुभद्रां भद्रभाषिणीम्।
सा शचीव महेन्द्रेण श्री: कृष्णेनेव संगता॥ ४४॥
सुभद्रा युयुजे प्रीत्या पाण्डवेनार्जुनेन ह।
 
 
अनुवाद
उसी समय उन्होंने पवित्र तीर्थस्थानों की यात्रा की और नागकन्या उलूपी को पाकर पाण्डुराज चित्रवाहन की पुत्री चित्रांगदा को भी प्राप्त किया और उन दोनों के साथ उन स्थानों में कुछ समय तक निवास किया। तत्पश्चात, किसी समय वे द्वारका में भगवान श्रीकृष्ण के पास गए। वहाँ अर्जुन ने शुभ वचन बोलने वाली कामललोचना सुभद्रा को अपनी पत्नी बनाया, जो वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण की छोटी बहन थीं। जैसे शची इन्द्र के साथ और लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ एकाकार हो गईं, वैसे ही सुभद्रा बड़े प्रेम से पाण्डुनन्दन अर्जुन के साथ एकाकार हो गईं। 43-44 1/2॥
 
At the same time, he traveled to the holy places of pilgrimage and after finding the snake girl Ulupi, he also acquired Chitrangada, the daughter of Pandash king Chitravahana, and lived with both of them in those places for some time. After that, at some time he went to Lord Krishna in Dwarka. There Arjuna took as his wife Kamalalochna Subhadra, who spoke auspicious words, who was the younger sister of Vasudevanandan Shri Krishna. Just as Shachi got united with Indra and Lakshmi got united with Lord Vishnu, similarly Subhadra got united with Pandunandan Arjun with great love. 43-44 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)