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mahabharat 1.61.50-51: फिर शकुनों की सहायता से उसने छलपूर्वक पासों के खेल द्वारा युधिष्ठिर को धोखा देकर बारह वर्ष तक वन में और तेरहवें वर्ष किसी देश में अज्ञातवास के लिए भेज दिया। इसके बाद चौदहवें वर्ष पाण्डव लौट आए और अपना राज्य और धन माँग लिया॥50-51॥   |   mahabharat अध्याय 1.61: कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 61: कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश  »  श्लोक 50-51
 
 
श्लोक  1.61.50-51 
ततोऽक्षैर्वञ्चयित्वा च सौबलेन युधिष्ठिरम्।
वनं प्रस्थापयामास सप्त वर्षाणि पञ्च च॥ ५०॥
अज्ञातमेकं राष्ट्रे च ततो वर्षं त्रयोदशम्।
ततश्चतुर्दशे वर्षे याचमाना: स्वकं वसु॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
फिर शकुनों की सहायता से उसने छलपूर्वक पासों के खेल द्वारा युधिष्ठिर को धोखा देकर बारह वर्ष तक वन में और तेरहवें वर्ष किसी देश में अज्ञातवास के लिए भेज दिया। इसके बाद चौदहवें वर्ष पाण्डव लौट आए और अपना राज्य और धन माँग लिया॥50-51॥
 
Then with the help of the omens he cheated Yudhishthira through a fraudulent game of dice and sent him to live in the forest for twelve years and incognito in a country for the thirteenth year. After this, in the fourteenth year the Pandavas returned and asked for their kingdom and wealth. ॥ 50-51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)