Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.61.45-47h: तत्पश्चात् कुन्तीकुमार अर्जुन ने खाण्डवप्रस्थ में भगवान वासुदेव के साथ रहकर अग्निदेव को संतुष्ट किया। नृपश्रेष्ठ जनमेजय! भगवान श्रीकृष्ण के साथ रहने से अर्जुन को इस कार्य में अधिक परिश्रम या भार नहीं लगा, उसी प्रकार जैसे दृढ़ निश्चय के बल से भगवान विष्णु को शत्रुओं का संहार करते समय कोई भार या परिश्रम नहीं लगता। 45-46 1/2॥ | mahabharat अध्याय 1.61: कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् कुन्तीकुमार अर्जुन ने खाण्डवप्रस्थ में भगवान वासुदेव के साथ रहकर अग्निदेव को संतुष्ट किया। नृपश्रेष्ठ जनमेजय! भगवान श्रीकृष्ण के साथ रहने से अर्जुन को इस कार्य में अधिक परिश्रम या भार नहीं लगा, उसी प्रकार जैसे दृढ़ निश्चय के बल से भगवान विष्णु को शत्रुओं का संहार करते समय कोई भार या परिश्रम नहीं लगता। 45-46 1/2॥
After that, Kuntikumar Arjuna satisfied Agnidev by staying with Lord Vasudev in Khandavaprastha. Nripashrestha Janmejaya! Being with Lord Shri Krishna, Arjuna did not feel much hard work or burden in this work, in the same way as Lord Vishnu does not feel any burden or hard work while killing the enemies of God with the help of strong determination. 45-46 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥