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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 61: कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश  »  श्लोक 39-42
 
 
श्लोक  1.61.39-42 
एवं चक्रुरिमां सर्वे वशे कृत्स्नां वसुन्धराम्।
पञ्चभि: सूर्यसंकाशै: सूर्येण च विराजता॥ ३९॥
षट्सूर्येवाभवत् पृथ्वी पाण्डवै: सत्यविक्रमै:।
ततो निमित्ते कस्मिंश्चिद् धर्मराजो युधिष्ठिर:॥ ४०॥
वनं प्रस्थापयामास तेजस्वी सत्यविक्रम:।
प्राणेभ्योऽपि प्रियतरं भ्रातरं सव्यसाचिनम्॥ ४१॥
अर्जुनं पुरुषव्याघ्रं स्थिरात्मानं गुणैर्युतम्।
(धैर्यात् सत्याच्च धर्माच्च विजयाच्चाधिकप्रिय:।
अर्जुनो भ्रातरं ज्येष्ठं नात्यवर्तत जातुचित्॥ )
स वै संवत्सरं पूर्णं मासं चैकं वने वसन्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सभी पाण्डवों ने सम्पूर्ण पृथ्वी को अपने अधीन कर लिया। वे पाँचों भाई सूर्य के समान तेजस्वी थे और आकाश में प्रतिदिन उदय होने वाले सूर्य के समान तेजस्वी थे; इस प्रकार सत्यवादी पाण्डवों के सान्निध्य से यह पृथ्वी मानो छः सूर्यों से प्रकाशित हो रही थी। तदनन्तर किसी के निमित्त होने से सत्यनिष्ठ और पराक्रमी राजा युधिष्ठिर ने अपने भाई अर्जुन को, जो पुरुषों में श्रेष्ठ, शुभ भावना वाले, प्राणों से भी प्रिय, स्थिर बुद्धि और सद्गुणों वाले थे, वन में भेज दिया। अर्जुन अपने धैर्य, सत्य, धर्म और विजय के कारण अपने भाइयों को अधिक प्रिय थे। उन्होंने अपने बड़े भाई की आज्ञा का कभी उल्लंघन नहीं किया था। वे बारह वर्ष एक मास तक वन में रहे।
 
In this way all the Pandavas brought the entire earth under their control. Those five brothers were as bright as the sun and were as bright as the sun that rises every day in the sky; In this way, due to the presence of the truthful Pandavas, this earth became as if illuminated by six suns. Thereafter, due to someone being an instrument, Yudhishthir, the mighty king of truth and mighty in power, sent his brother Arjun, the best of men, of good intentions, who was very dear to him even with his life, having stable mind and virtuous qualities, into the forest. Arjun was more loved by his brothers because of his patience, truth, righteousness and victory. He had never disobeyed his elder brother's orders. He remained in the forest for twelve years and one month. 39-42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)