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mahabharat 1.61.30-31: वहाँ उन्होंने सुना कि पाँचाल देश की राजकुमारी कृष्णा का स्वयंवर होने वाला है। यह सुनकर पांडव वहाँ गए और राजकुमारी को प्राप्त कर लिया। द्रौपदी को प्राप्त करने के बाद, वे पहचाने जाने पर भी एक वर्ष तक पाँचाल देश में ही रहे। फिर शत्रुदमन पांडव हस्तिनापुर लौट आए। 30-31।   |   mahabharat अध्याय 1.61: कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 61: कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  1.61.30-31 
ततस्ते शुश्रुवु: कृष्णां पञ्चालेषु स्वयंवराम्।
श्रुत्वा चैवाभ्यगच्छन्त गत्वा चैवालभन्त ताम्॥ ३०॥
ते तत्र द्रौपदीं लब्ध्वा परिसंवत्सरोषिता:।
विदिता हास्तिनपुरं प्रत्याजग्मुररिंदमा:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उन्होंने सुना कि पाँचाल देश की राजकुमारी कृष्णा का स्वयंवर होने वाला है। यह सुनकर पांडव वहाँ गए और राजकुमारी को प्राप्त कर लिया। द्रौपदी को प्राप्त करने के बाद, वे पहचाने जाने पर भी एक वर्ष तक पाँचाल देश में ही रहे। फिर शत्रुदमन पांडव हस्तिनापुर लौट आए। 30-31।
 
There they heard that the swayamvara of the princess of Panchal country, Krishna, was going to take place. Hearing this, the Pandavas went there and got the princess. After getting Draupadi, they stayed in Panchal country for a year even though they were recognized. Then the Shatrudaman Pandavas returned to Hastinapur. 30-31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)