Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.61.3: जनमेजय! इस महाभारत की कथा सुनने के लिए आप ही सर्वश्रेष्ठ हैं। यह कथा मेरे पास उपलब्ध है और मुझे श्री गुरुजी के मुख से आपको यह कथा सुनाने की आज्ञा मिली है। इससे मुझे बड़ा उत्साह मिल रहा है।॥3॥   |   mahabharat अध्याय 1.61: कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 61: कौरव-पाण्डवोंमें फूट और युद्ध होनेके वृत्तान्तका सूत्ररूपमें निर्देश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.61.3 
श्रोतुं पात्रं च राजंस्त्वं प्राप्येमां भारतीं कथाम्।
गुरोर्वक्त्रपरिस्पन्दो मन: प्रोत्साहतीव मे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! इस महाभारत की कथा सुनने के लिए आप ही सर्वश्रेष्ठ हैं। यह कथा मेरे पास उपलब्ध है और मुझे श्री गुरुजी के मुख से आपको यह कथा सुनाने की आज्ञा मिली है। इससे मुझे बड़ा उत्साह मिल रहा है।॥3॥
 
Janmejaya! You are the best person to listen to the story of this Mahabharata. I have this story available to me and I have received the order from the mouth of Shri Guruji to narrate the story to you. This gives me great enthusiasm. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)